SGPT test in hindi क्या है, नॉर्मल रेंज, कैसे होता है, क्यों और कब?

SGPT test एक तरह का खून टेस्ट होता है यह टेस्ट इसलिए करते हैं ताकि जिगर (liver) की बीमारियों का पता लगाया जा सके, इस खून टेस्ट में एक महत्वपूर्ण (ALT) लिवर एंजाइम के स्तर को बताता है।

Sgpt का मतलब क्या होता है? What is sgpt test?

SGPT test in hindi
SGPT test in hindi

sgpt का सीधा मतलब होता है खून टेस्ट करना यह लीवर से संबंधित बीमारियों का पता लगाने के लिए किया जाने वाला टेस्ट है जिसमें एक विशेष एंजाइम के स्तर को मापा जाता है।

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sgpt test के अन्य नाम क्या हैं?

  • एएलटी टेस्ट
  • सीरम ग्लूटामिक-पायरुविक टेस्ट (एसजीपीटी)
  • ग्लूटामिक-पायरुविक टेस्ट (जीपीटी)

Sgpt नमूना प्रकार

एसजीपीटी को ALT test भी कहा जाता है जिसमें खून के नमूने इकट्ठा करके जांच की जाती है इस टेस्ट के लिए ज्यादातर खून हाथों की नसों से लिया जाता है।

आपको कितनी बार SGPT test करना चाहिए?

अगर किसी मरीज को एसजीपीटी टेस्ट कराने के बाद जिगर में समस्या आती है जिसके लिए डॉक्टर उन्हें इलाज करने के लिए सलाह देते हैं और खाने के लिए दवाई देते हैं ऐसे में मरीज को चाहिए की दवाई का कोर्स पूरा करने के बाद दोबारा SGPT test कराएं ताकि पता लग सके की आपको कितना फायदा हुआ है।

वहीं अगर किसी व्यक्ति का एसजीपीटी टेस्ट हुआ और उसमें लीवर की कोई समस्या सामने नहीं आई तो ऐसे लोगों को खुद की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए हर साल एसजीपीटी टेस्ट करवाना चाहिए।

SGPT test में कौन से पैरामीटर शामिल हैं?

एसजीपीटी खून टेस्ट में एकमात्र पैरामीटर खून में ALT का इस level मापना होता है यह स्तर लीवर की बीमारियों के बारे में जानकारी देने के लिए मापा जाता है जिसमें पता चलता है कि लीवर में बीमारी है या नहीं।

एएलटी का कम स्तर सामान्य माना जाता है, जबकि बढ़ा हुआ एएलटी का स्तर चिंताजनक स्थिति है क्योंकि वे liver disease के संकेत हैं।

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sgpt test क्या पता लगाता है?

SGPT test या एएलटी खून टेस्ट में एएलटी के स्तर को मापा जाता है जिससे यह पता लगाया जा सके कि लीवर में कोई बीमारी है या नहीं।

इस टेस्ट को करने के लिए डॉक्टर अक्सर ऐसे मरीजों को सलाह देते हैं जिनको लीवर में समस्याओं का करना पड़ता है।

SGPT test कब करवाना चाहिए? (एसजीओटी और एसजीपीटी बढ़ने के क्या कारण हैं?)

यदि आपको निम्न समस्याएं हो रही है तो आपको यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए:

• पेट में दर्द और सूजन 

• उल्टी करना

• घबराहट

• पीली आंखें और त्वचा

• थकान

• कमजोरी

• गहरे रंग का मूत्र और हल्के रंग का पौप

• खुजली वाली त्वचा

कुछ अन्य कारणों से एक व्यक्ति को परीक्षण निर्धारित किया जा सकता हैः

• हेपेटाइटिस वायरस के संपर्क में

• ज्यादा मात्रा में शराब पीना

• यदि परिवार में लिवर संबंधित क्षति का इतिहास हो।

• यह आपने ऐसी दवाई खाई है जो जिगर को नुकसान पहुंचाती है।

• समय समय पर जिगर की बीमारी की प्रगति की जांच करने के लिए

• यह जानकारी प्राप्त करने के लिए कि क्या लिवर बीमारी के लिए उपचार दिया जा सकता है।

  • यह बात जानने के लिए कि कितनी अच्छी तरह से उपचार काम कर रहा है।

Sgpt कितना होना चाहिए?

आमतौर पर एसजीओटी और एसजीपीटी का स्तर पुरुषों में 30 और महिलाओं में 19 होना चाहिए लेकिन 45 से ज्यादा महिलाओं में और 50 से ज्यादा पुरूषों में, स्तर होने पर यह चिंताजनक विषय साबित हो सकता है एसजीपीटी के लेवल में बढ़ोतरी होना पुरानी लीवर की बीमारियों का संकेत है।

एसजीपीटी बढ़ने के लक्षण

इसके कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं-

• पेट में दर्द रहना।

• लीवर पर सूजन।

• उल्टी की शिकायत रहना।

• पीलिया होना।

• नींद में कमी।

• बेचनी और घबराहट महसूस करना।

• कमजोरी और थकावट का अनुभव।

• भूख न लगना।

• त्वचा पर खुजली होना।

एसजीपीटी का कौन सा स्तर लिवर खराब होने का संकेत देता है?

एसजीपीटी खतरनाक स्तर

एसजीपीटी परीक्षण रक्त में एएलटी लेवल को बताता है। जब मरीज पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना) जैसे लिवर की बीमारी के लक्षण से गुजरता है उससे पहले ही यह सुनिश्चित हो जाता है कि उसे लीवर समस्या है।

उसके लिए डॉक्टर टेस्ट के माध्यम से बीमारी का पता लगाने के लिए एसजीपीटी टेस्ट करते हैं एसजीपीटी का उच्च स्तर लिवर की बीमारियों का संकेत होता है। SGPT test जल्दी से जल्दी निदान में उपयोगी हो सकता है।

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यदि एसजीपीटी ऊंचा हो तो क्या होगा?

अगर किसी का एसजीपीटी ऊंचा है इसका मतलब है कि उसे लीवर की बीमारियां हो रही है जैसे की फैटी लीवर या लीवर पर सूजन, पित्त की नली में दिक्कत की वजह से भी यह स्तर ऊंचा हो सकता है ऐसे में डॉक्टर बीमारी को पहचान कर तुरंत इलाज के लिए सलाह देते हैं और आपको अपनी बीमारी को दूर करने में मदद करते हैं।

आपको सही इलाज प्राप्त करने के लिए (यदि एसजीपीटी अधिक पाया जाता है) तो डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए और उनके निर्देशन में पूरा ट्रीटमेंट लेते रहना चाहिए।

60 के एसजीपीटी का क्या मतलब है?

इसका मतलब होता है उच्च एएलटी का स्तर एसजीपीटी की नोर्मल रेंज 7 से 55 यूनिट प्रति लीटर खून के बीच होनी चाहिए। इसलिए एसजीपीटी 60 को high माना जाएगा।

डॉक्टर एसजीपीटी परीक्षण क्यों करते हैं?

डॉक्टर एसजीपीटी टेस्ट इसलिए करते हैं ताकि लीवर की बीमारियों का पता लगाया जा सके, डॉक्टर यह जानना चाहते हैं कि मरीज को किस तरह की लीवर की समस्या हो रही है और उन्हें किस तरह का इलाज दिया जाना चाहिए इसी के लिए sgpt test किया जाता है।

क्या एसजीपीटी में फैटी लीवर की मात्रा अधिक है?

एसजीपीटी में फैटी लीवर मुख्य समस्या सामने आती है अधिकतर जिन लोगों का sgpt test किया जाता है यदि उनकी हालत नॉर्मल नहीं होती उन्हें लीवर की बीमारी होती है तो ज्यादातर मामलों में उन्हें फैटी लीवर की समस्या होती है अधिकतर ऐसा ही देखा जाता है।

sgot/sgpt test in hindi अंतर समझें:

sgot/sgpt दोनों का मतलब एक ही होता है यह दोनों ही परीक्षण होते हैं जिसमें लिवर एंजाइम का स्तर मापा जाता है यह पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति को लीवर की बीमारियां है या नहीं।

जहां एसजीओटी (SGOT) का मतलब होता है सीरम ग्लूटामिक-ऑक्सालोएसेटिक ट्रांसएमिनेस वहीं एसजीपीटी (SGPT) को सीरम ग्लूटामेट-पायरूवेट ट्रांसएमिनेस या एलनिन एमिनोट्रांसफेरेज (एएलटी) नाम से समझा जाता है।

इनमें एक छोटा सा अंतर होता है SGOT लीवर के साथ किडनी, मांसपेशियों, हृदय और यहां तक कि मस्तिष्क में भी पाया जाता है। जबकि, SGPT मुख्य रूप से लीवर में ही पाया जाता है।

यानी लीवर की बीमारियों में एसजीपीटी का लेवल बढ़ता है और SGOT का लेवल लीवर की समस्याओं, दिल के दौरे (heart attacks) मांसपेशियों की चोटों (muscle injuries) के दौरान भी बढ़ सकता है।

SGPT test in hindi normal range

एसजीपीटी 50 को सामान्य माना जा सकता है क्योंकि एसजीपीटी के लिए सामान्य रेंज 7 से 55 यूनिट प्रति लीटर खून के बीच होती है। इसलिएन 50 इसका normal range माना जाता है।

1 हफ्ते में Sgpt कैसे कम करें?

यदि आपने SGPT test कराया है और उसमें आपका एसजीपीटी उच्च आया है ऐसे में आप इसे कम करना चाहते हैं इसके लिए विटामिन डी युक्त भोजन का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें। क्योंकि vitamin D लिवर बीमारियों को ठीक करने, लीवर की समस्याओं को रोकने और एसपीटी के स्तर को सामान्य स्तर पर लाने के लिए बहुत मदद करता है।

इसके लिए अपने खाने में ऐसी चीजे लें जिसमें विटामिन डी भरपूर मात्रा में हो जैसे कि मशरूम, अंडे, सेब, हरी पत्तेदार और दूध, संतरा इत्यादि यह सभी विटामिन डी के अच्छे सोर्स हैं इनसे आपको काफी अच्छी मात्रा में विटामिन डी प्राप्त हो जाता है।

इसके अलावा फ्री में प्राकृतिक तरीके से विटामिन डी प्राप्त करने के लिए सूरज की रोशनी में बैठे हैं लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि तेज धूप में नहीं बैठना है सुबह 10:00 बजे से पहले या शाम को 5:00 के बाद की धूप लेनी चाहिए।

इससे आपको विटामिन डी काफी अच्छी मात्रा में मिल जाता है लेकिन अपनी डाइट पर भी विशेष ध्यान देना है ताकि आपको जल्दी फायदा हो और एसजीपीटी का स्तर सामान्य हो जाए।

कैसे SGPT लेवल घटाएं?

यदि आप एसजीपीटी का लेवल घटाना चाहते हैं तो निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें:

1. पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लें ज्यादातर प्लांट बेस्ड डाइट सेवन करें।

2. भोजन में विटामिन D ज्यादा खाएं।

3. 4ज्यादा नमक या सोडियम वाले फूड्स खाने से बचना चाहिए।

4. फैट की प्रचुर मात्रा वाले फूड्स से दूर रहें।

5. जब तक आपका SGPT लेवल नॉर्मल नहीं हो जाता, शराब पीना बंद करें।

6. हाइड्रेटेड रहें और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की आदत डालें।

7. दूसरे हानिकारक केमिकल के सम्पर्क से भी बचें।

8. हफ्ते में 3 या अधिक दिन वेट लिफ्टिंग या एरोबिक्स ट्राय करें।

9. अगर आपका वजन ज्यादा है तो सुरक्षित तरीके से वज़न घटायें।

10. एंटीवायरल दवाएं लें।

11. ब्लड टेस्ट जरूर कराएं।

12. बाज़ार में मिलने वली दवाएं लेना बंद करें।

Saniya Qureshi is a Health and Beauty writer, senior consultant and health educator with over 5 years of experience.

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