Sadguru से जानिए रात को भूखा सोने के फायदे, सिर्फ 6 हफ्ते खाली पेट सोने जाए होगा चमत्कार

आपका दिमाग़ सबसे अच्छी तरह से तभी काम करता है अगर आपका पेट खाली हो। अक्सर हमारे बड़े हमें कहते हैं कि खाली पेट नहीं सोना चाहिए, नहीं तो कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं और हमें भी खाली पेट नींद नहीं आती, हमें लगता है हम सो नहीं पाएंगे, जबकि भूखा सोना बेहद फायदेमंद होता है।

सद्गुरु ने अपनी एक वीडियो में बताया है कि वह हमेशा खाली पेट सोते हैं और सिर्फ दिन में 1 बार ही भोजन करते हैं उसके बाद वह अगले दिन ही खाते हैं। ऐसा करने से उन्हें किसी भी तरह की बीमारी नहीं होती, और वह हमेशा स्वस्थ जीवन व्यतीत करते हैं।

रात को भूखा सोने के क्या फायदे होते हैं आखिर क्यों सोना चाहिए खाली पेट?

Sadguru से जानिए रात को भूखा सोने के फायदे
Sadguru से जानिए रात को भूखा सोने के फायदे

अगर आप हमेशा रात को खाली पेट सोएंगे तो आप पाएंगे कि आपको जो भी स्वास्थ्य समस्याएं हैं उनमें आधी यानी 50% बीमारियां खुद ब खुद ठीक हो जाएंगी। और ऐसा सिर्फ 6 हफ्ते में ही देखने को मिलेगा। मतलब 6 हफ्ते अगर आप खाली पेट सोते हैं तो आपको जो भी बीमारियां है 50% खुद ही ठीक हो जाएंगी।

सद्गुरु कहते हैं कि मैं 40 साल से इस बारे में कह रहा हूं जो लोग मेरी बात को मानकर फॉलो करते हैं और रात को खाली पेट सोते हैं कुछ ही दिनों में उनकी सभी तरह की स्वास्थ्य समस्याएं खत्म हो जाती हैं। और वह बिना दवाई और बिना कोई पैसा खर्च किए हमेशा खुशहाल जिंदगी जीते हैं।

इसका सिर्फ एक ही कारण होता है कि वह बहुत ज्यादा नहीं खाते, हमेशा सिर्फ खाने के लिए नहीं जीते बल्कि जीने के लिए खाते हैं। बहुत जरूरी है कि इंसान इस बात को समझे कि उन्हें खाने के लिए नहीं जीना, बल्कि अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए जरूरत के हिसाब से ही भोजन करना है बहुत ज्यादा खाने से जीवन अच्छा नहीं होता।

सद्गुरु ने यह भी बताया कि उनके योग केंद्र में सभी लोग सुबह 10:00 बजे भोजन करते हैं और उसके बाद शाम को 7:00 बजे खाना खाते हैं बस दिन में दो टाइम ही वहां पर लोग भोजन करते हैं उसके अलावा वह पूरे दिन अपना काम करते हैं।

योग केंद्र बहुत बड़ा है एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए काफी चलना पड़ता है लगभग आधे से 1 किलोमीटर की दूरी एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए तय करनी पड़ती है। जिसके लिए साइकिल चलाकर या पैदल जाना पड़ता है यानी शारीरिक काम बहुत ज्यादा करना पड़ता है।

लेकिन फिर भी वहां के लोग हमेशा ऊर्जावान महसूस करते हैं और स्वस्थ व तंदुरुस्त रहते हैं क्योंकि खाली पेट होने का मतलब यह नहीं है कि आपके शरीर को खाने की जरूरत है। भूख लगना और शरीर में ऊर्जा की कमी होना दोनों में अंतर होता है।

अगर शरीर में ऊर्जा की कमी होती है और आपको अपना पेट खाली महसूस हो रहा है तब आपको खाने की जरूरत है, लेकिन अगर आपने अभी भोजन किया है या स्नेक्स खाए हैं उसके बाद 1 घंटे बाद फिर से खाने का वक्त हो गया है और आप सिर्फ इसलिए खा रहे हैं क्योंकि यह खाने का समय है।

तो आप अपने शरीर को बीमार कर रहे हैं आपके शरीर को वास्तव में खाने की जरूरत है ही नहीं। आप जबरदस्ती अपने शरीर में खाना पहुंचा रहे हैं ऐसे में शरीर के अंदर मौजूद अंगों को बहुत ज्यादा काम करना पड़ेगा, इसी कारण कोई भी इंसान बीमार पड़ता है।

अगर इंसान इस छोटी सी बात पर ध्यान दें और केवल समय पर भोजन करें, उसके बाद अपने पेट को खाली रखें। तो ऐसे में शरीर के सभी organs स्वस्थ रहते हैं खाना आसानी से पचता है और किसी भी तरह की बीमारी इंसान को नहीं होती, प्रतिरक्षा प्रणाली भी बहुत ज्यादा हेल्दी रहती है।

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आधुनिक विज्ञान का तर्क

आज science ने भी इस बात को proove कर दिया है कि हमारा दिमाग सबसे ज्यादा सही तरीके से तब ही काम करता है जब हमारा पेट खाली हो। इसीलिए पेट को हमेशा भरने की कोशिश ना करें, कभी किसी चीज का मन करता है तो खाते ना रहे। ऐसा करने से व्यक्ति आलसी बनता है और उसका काम करने में मन नहीं लगता।

लोगों को लगता है कि वह भूखे नहीं सो सकते, जबकि ऐसा नहीं है, आप भूखे बहुत अच्छे से सो सकते हैं। बल्कि भूखा इंसान अपनी पूरी नींद बिना किसी प्रॉब्लम के ले सकता है। जबकि जो इंसान बहुत ज्यादा खाता है उसे नींद से संबंधित समस्याएं हो जाती है उसकी नींद में गड़बड़ी हो जाती है और वह ठीक से नहीं सो पाता बेचैन रहता है।

शरीर में सुधार या शुद्ध कब होती है?

आपके शरीर में किसी भी तरह का सुधार या शारीरिक शुद्धि तब होती है जब आपका पेट खाली हो आप भूखे हो। इसके अलावा अगर आप आयुर्वेदिक दवाई ले रहे हैं या किसी तरह की डाइट को फॉलो कर रहे हैं तो उनसे आपकी कोशिकाओं की शुद्धि बहुत अच्छे से नहीं हो पाती।

अगर आप अपने शरीर में सुधार चाहते हैं किसी बीमारी से बचना चाहते हैं या किसी तरह की बीमारी को खत्म करना चाहते हैं तो बेफिजूल ना खाएं दिन में दो वक्त ही भोजन करें।

अगर आप दिन में कई बार खाते हैं तो इसका एक बड़ा साइड इफेक्ट आलस्य है:

हम सभी यहां जीने के लिए आए हैं या सिर्फ खाने के लिए आए हैं, हर किसी का जवाब यही होगा कि वह एक स्वस्थ जीवन शैली जीना चाहता है, खुश रहना चाहता है और अपने जीवन को खुशहाल तरीके से महसूस करना चाहता है। और इसीलिए वह इस दुनिया में Struggle कर रहा है किसी न किसी तरीके से खुश रहना ही हर इंसान का उद्देश्य रहता है।

लेकिन आलसी इंसान कभी भी खुशहाल जीवन नहीं जी पाता। वह आलस के चलते ज्यादा सोता है ज्यादा सोना भी एक आलसी होने की निशानी है।

और इसके पीछे की बड़ी वजह है बहुत ज्यादा खाना बेवजह बेफिजूल में कुछ भी कभी भी खाते रहना। टाइम बना लिया है सुबह को 12:00 बजे खाना है शाम को 7:00 बजे खाना है रात को 9:00 बजे खाना है फिर सुबह में 8:00 बजे खाना है तो यह सभी टाइम फॉलो करते रहना और चाहे आपको भूख हो या ना हो इस समय जरूर कुछ ना कुछ खाना ही, आलस्य को बढ़ावा देता है।

ज्यादातर लोगों ने अपने system को परेशानी बना रखा है:

सद्गुरु जी इस बात को इस उदाहरण से समझाते हैं कि जैसे आपकी कार हर महीने सर्विस के लिए जाती है तो वह हेल्दी है और अच्छी बात है कि आप उसकी सर्विस महीने में करवाते रहते हैं। लेकिन अगर आप हर महीने उसे सर्विस के लिए भेजते हैं और 15 दिन उसकी सर्विस होती रहती है तो इसका मतलब है कि कार में बड़ी प्रॉब्लम है।

इसी तरह इंसानों ने भी अपने सिस्टम को एक बड़ी प्रॉब्लम बना लिया है उनका शरीर उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। कोई इंसान अपने मोटापे से परेशान है तो कोई बहुत ज्यादा पतला है, किसी को डायबिटीज है, किसी को थायराइड, किसी को दिल से संबंधित बीमारियां हैं, तो कोई ब्लड प्रेशर से परेशान है।

इसका मतलब है कि उनका शरीर उनके जीवन में एक बड़ी रुकावट है वह जो भी अपने जीवन में करना चाहते हैं नहीं कर पाते, क्योंकि उनके शरीर में क्षमता नहीं होती कि वह कुछ कर सके।

इसका महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जितना खाना चाहिए लोग उससे कहीं ज्यादा खाते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें बताया जाता है क्यों नहीं ज्यादा खाना चाहिए, क्योंकि कम खाने से वह कमजोर हो जाएंगे। नहीं, आपको कम खाना चाहिए क्योंकि शरीर को स्वस्थ रखने का यही सबसे आसान और सही तरीका है।

आजकल बड़ी-बड़ी कंपनियां कम ईंधन लेने वाली कार और मशीन बनाना चाहती हैं इसका मतलब क्या है कि अगर मशीनों को कुशलता से उपयोग किया जाए तो वह कम ईंधन में ज्यादा काम दे पाएंगी।

सद्गुरु ने यह भी बताया कि उनके कार्यक्रम में कुछ लोग आते थे जो कहते थे कि वह 12 घंटे के कार्यक्रम में बिना खाए नहीं रह सकते। और इसीलिए वह अपने साथ कुछ ना कुछ खाने के लिए लेकर आते हैं।

जब गुरु जी ने उनसे कहा कि आप बिना खाए यहां बैठें और हमारा कार्यक्रम सुने आपको कुछ नहीं होगा। तो कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि उन्हें डायबीटीज है उन्हें खाना ही पड़ेगा डॉक्टर ने उन्हें कहा है कि कुछ ना कुछ खाते रहना है।

तो यहां पर सद्गुरु जी कहते हैं कि यही गलती है आप हर वक्त कुछ ना कुछ खा रहे हैं इसी कारण से आपको कोई भी शारीरिक बीमारी हमेशा बनी रहती है आप बिना कुछ खाए मेरा कार्यक्रम सुनिए। तो तीन दिन बाद वह बिना कुछ खाए 12 घंटे तक कार्यक्रम में रहने लगे और उन्हें कुछ नहीं हुआ।

जो हमारे अंदर हम सोचते हैं कि अगर हम नहीं खाएंगे, तो हमें कुछ हो जाएगा, हमारी प्रॉब्लम बढ़ जाएगी, यह सब केवल हमारी मानसिकता है। हमारे शरीर को ऊर्जा के लिए खाने की जरूरत है और अगर हम बैठे हुए कोई कार्यक्रम सुन रहे हैं टीवी देख रहे हैं या कुछ भी ऐसा काम कर रहे हैं जिसमें शरीर को हिलाना नहीं पड़ रहा है तो ऐसे में हमें ऊर्जा की जरूरत है ही नहीं।

और अगर हम बैठे-बैठे खाएंगे तो यह बीमारी बढ़ाने का एक तरीका है हम अपने शरीर को खुद बीमारियों के हवाले कर रहे हैं। क्योंकि हमारा शरीर पहले से ही ऊर्जावान है पहले से ही जो हमने खा रखा है उसकी ऊर्जा हमारे शरीर में मौजूद है तो अगर हम और खाएंगे हमारे शरीर को और ज्यादा काम करना पड़ेगा और इसीलिए बीमारियां बढ़ने के चांसेस बढ़ जाते हैं।

आखिर सेहत बनती कैसे है?

देखिए समझने वाली बात है सेहत कोई ऐसी चीज नहीं है जो बाहर से बनती है सेहत हमारे शरीर के अंदर से बनने वाली प्रक्रिया है हम अपने स्वास्थ्य को अपने अंदर से बनाते हैं। बाहरी मदद की जरूरत तब पड़ती है जब हमारी हेल्थ में किसी तरह की दिक्कत आती है वह केवल सेहत को सुधारने के लिए ना की सेहत बनाने के लिए।

लेकिन अगर आपको हर समय कोई ना कोई परेशानी है आप टेंशन में रहते हैं ब्लड प्रेशर बढ़ता घटता रहता है या कोई भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या आपको बनी रहती है तो इसका मतलब है कि आप एक खराब मशीन है।

यह तो आप भी जानते ही है कि हमारे शरीर के अंदर के अंग हमेशा काम करते रहते हैं और वह इसलिए काम करते हैं ताकि हम स्वस्थ बने रहे हैं और हम एक अच्छी जीवन शैली जी पाए लेकिन सिर्फ वह काम करते हैं हम अपने स्वास्थ्य को सुधारने के लिए काम नहीं कर रहे हैं।

एक भोजन से दूसरे भोजन में कितना अंतराल होना चाहिए?

योग में बताया जाता है कि एक बार भोजन करने के बाद 8 घंटे बाद ही कुछ खाना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो कुछ ही दिनों में आप देखेंगे कि आपकी बीमारियां ठीक हो रही है जो बीमारी दवाइयां से ठीक नहीं हो रही थी वह खुद अपने आप सही हो जाएगी।

इसके अलावा अगर आप खाली पेट सोने जाएं और सिर्फ 20 मिनट के लिए किसी भी तरह का योग अभ्यास रोजाना करें तो आप देखेंगे की 6 हफ्तों में आपकी बीमारियां 90% तक ठीक हो जाएंगी, और यह एक जादू की तरह होगा। जिस पर विश्वास शायद अभी आपको ना हो, लेकिन सिर्फ 6 हफ्ते ऐसा करके देखें आप विवश हो जाएंगे विश्वास करने पर।

Saniya Qureshi is a Health and Beauty writer, senior consultant and health educator with over 5 years of experience.

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