kriya yoga की 5 शाखाएं कौन सी हैं? (विस्तार से समझें)

क्रिया योग भारत के महान गुरु, बाबाजी नागराज ने 18 सिद्ध परंपरा की प्राचीन शिक्षाओं के जोड़ के रूप में पुनरुद्धार किया था। क्रिया योग में पांच चरण या क्रियाएं शामिल होती हैं जिनमें 1. हठ योग, 2. कुंडलिनी 3. प्राणायाम, 4. ध्यान योग, 5. मंत्र योग और भक्ति योग शामिल हैं।

क्रिया योग की 5 शाखाएं कौन सी हैं?
kriya yoga: क्रिया योग की 5 शाखाएं कौन सी हैं?

kriya yoga की 5 मुख्य शाखाएँ इस प्रकार हैं:

1. क्रिया योग के अभ्यासकर्ता: क्रिया योग के अभ्यास में मुख्य ध्यान योगासन और प्राणायाम होता है।

2. क्रिया योग के सद्गुरु: इस शाखा में, गुरु की उपासना और गुरु के साथ एकात्मता का महत्व दिया जाता है।

3. क्रिया योग के नाद: इस शाखा में, आवाज़ के जरिए ध्यान का अभ्यास किया जाता है, जिसे नाद योग भी कहते हैं।

4. क्रिया योग के सानन्द: इस शाखा में, आनंद और आत्मा के साथ एकात्मता के अभ्यास का महत्व समझाया जाता है।

5. क्रिया योग की क्रिया: इस शाखा में आत्मा के आध्यात्मिक विकास के लिए क्रिया योग के विभिन्न आसन और तकनीक का अभ्यास किया जाता है।

ऊपर बताए गए पांचों शाखाएं भी इन्हीं पांचों के अंतर्गत आती हैं यदि आप इस क्रिया विधि को सही तरीके से बीना कन्फ्यूजन के सीखना चाहते हैं तो एक अपने गुरु से मार्गदर्शन लेकर इसे सीखें।

क्रिया योग का अर्थ क्या है?

क्रिया योग आध्यात्मिक विकास (आध्यात्म) के बारे में बताता है। इसके माध्यम से व्यक्ति को ऐसे आत्मज्ञान या आत्मनुभूति की प्राप्ति होती है जो व्यक्ति को ईश्वर के बारे में बताता है।

यह योग क्रिया ध्यान के माध्यम से जागरूकता और आत्म-चेतना पैदा करने में सहायता करती है। इसके निरंतर अभ्यास से व्यक्ति की अपनी आत्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है क्रिया योग का अर्थ है ‘  क्रिया का योग  ‘ इस योगासन को करने का निर्देश सबसे महत्वपूर्ण है।

क्रिया योग की विधि

क्रिया योग का ध्यान और साधना करने का मुख्य उद्देश्य आत्मा की एकता और आत्मा के साथ ब्रह्म की एकता को प्राप्त करना होता है। यहां कुछ क्रिया योग की मुख्य विधियां हैं:

आसन:

क्रिया योग की शुरुआत आसनों से होती है। योगासन और मुद्राएँ क्रिया योग के अभ्यास में जरूरी माने जाते हैं। ये आसन शरीर को स्थिर और आत्मा को शांति प्रदान करने में मदद करते हैं।

प्राणायाम:

प्राणायाम kriya yoga का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है, जिसमें श्वास और प्राण को कंट्रोल किया जाता है। यह मानव शरीर में प्राण शक्ति को जागृत करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

ध्यान:

Kriya yoga में ध्यान का एक अहम स्थान होता है। ध्यान के माध्यम से आप अपने मन को शांत करके आत्मा की ओर ध्यान केंद्रित करते हैं।

मंत्र जाप:

मंत्र जाप क्रिया योग का एक बहुत जरूरी अंग है, जिसमें आप एक मंत्र को बार-बार जपते हैं। यह आत्मा को गहराई में ले जाने में मदद करता है।

आहार:

सात्त्विक आहार को प्राथमिकता देना भी क्रिया योग का हिस्सा होता है। सात्त्विक आहार आत्मा के उन्नति के लिए महत्वपूर्ण होता है।

Kriya yoga को अपने जीवन में जोड़ने के लिए योग गुरु के मार्गदर्शन से इस योग का अभ्यास करना चाहिए। यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को हमेशा बेहतर बनाता है और आत्म शक्ति प्रदान करता है।

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क्रिया योग कौन सा धर्म है?

क्रिया योग कोई धर्म नहीं है यह एक आध्यात्मिक मार्ग है, यह एक ऐसा आत्म शक्ति प्रदान करने वाला तरीका है, जो उन सभी के लिए खुला है जो लोग केवल आत्मिक शांति और संतुलित, संपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं।

क्रिया योग से क्या लाभ है? – Kriya Yoga Benefits in Hindi

kriya yoga करने से निम्नलिखित फायदे प्राप्त होते हैं-

1. यह आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है।

2. इसे करने से व्यक्ति ईश्वर से जुड़ा महसूस करता है।

3. यह योग व्यक्ति को मन पर काबू पाने के लिए क्षमता देता है।

4. जो लोग इस योगासन को नियमित रूप से करते हैं उनका बौद्धिक विकास तेजी से होता है।

5. यह व्यक्तित्व विकास में सहायक है।

6. यह चक्रों को साफ और अनब्लॉक करता है।

7. शारीरिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

8. याददाश्त को मज़बूत बनाता है।

9. हड्डियों को स्ट्रोंग बनाने में मदद मिलती है।

10. आंखों की सेहत बेहतर बनती है।

11. तनाव और मानसिक दबाव नहीं होता।

12. इच्छाओं पर कंट्रोल कर सकते हैं।

13. सकारात्मक सोच बनती है।

14. डिप्रेशन नहीं होता।

15. व्यक्ति मन की खुशी महसूस कर पाता है।

क्रिया योग मंत्र

क्रिया योग करने के लिए कई अलग-अलग तरह के मंत्र बताए जाते हैं इसके लिए सबसे बेहतर और आसान मंत्र उच्चारण ॐ होता है।

kriya yoga करते समय ओम को गहरी सांस लेते हुए उच्चारण करना चाहिए ऐसा कहा जाता है कि ओम का उच्चारण गहराई से करने पर मानसिक आत्मिक और शारीरिक शांति प्राप्त होती है।

क्रिया योग कितने प्रकार के होते हैं?

क्रिया योग छे प्रकार के माने जाते हैं इन 6 kriya yoga को करने से मां की शांति प्राप्त होती है मानसिक विकास तेज से होता है व्यक्ति दुनिया में ना फंसकर ईश्वर से जुड़ता है।

इन छह प्रकार की क्रियाओं का अभ्यास ऋषि मुनियों और योग गुरुओं द्वारा किया जाता रहा है आज भी बहुत लोग इसका अभ्यास करते हैं और आत्मिक शांति महसूस करते हैं।

क्रिया योग के कितने अंग हैं?

ये छः अंग हैं – 1. प्राणायाम, 2. प्रत्याहार, 3. ध्यान, 4. धारणा 5. समाधि और 6. मंत्र योग और भक्ति योग।

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क्रिया योग के तीन स्तम्भ कौन से हैं?

क्रिया योग में तीन अलग-अलग क्रियाएं शामिल हैं –

1. टैप

2. स्वाध्याय

3. ईश्वर प्राणिधान (भक्ति) स्व-अध्ययन का एक साधन भी है।

यह तीर्थंकर स्तंभित नहीं हैं। इन त्रिक्रियाओं में प्रत्येक में अन्य दो भी शामिल होते हैं: उदाहरण के लिए, आत्म-अनुशासन, ऐसा करने से न केवल हम स्व-अध्ययन के लिए तैयार होते हैं बल्कि यह स्व-अध्ययन का एक साधन भी है।

क्रिया योग में कौन सी तकनीकें हैं?

लाहिड़ी महाशय kriya yoga शिक्षा के अनुसार, इसमें कई क्रियाएँ शामिल होती हैं। क्रिया के विभिन्न स्तर होते हैं। और हर एक क्रिया में केवल एक तकनीक नहीं होती, बल्कि इस योगविधि में तकनीकों का एक समूह शामिल होता है, सिखाने के समय, गुरु द्वारा अपने शिष्य को पहली क्रिया (6 तकनीकों का सेट) दी जाती है।

क्रिया योग कैसे किया जाता है?

क्योंकि क्रिया योग कोई एक योग नहीं है यह बहुत सारे योग का एक समूह होता है इसीलिए इसे सही तरीके से सीखना केवल गुरु के मार्गदर्शन पर ही संभव होता है।

क्रिया योग का अभ्यास करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन किया जा सकता है:

गुरु का मार्गदर्शन लें:

क्रिया योग का प्रैक्टिस करने से पहले, आपको एक अच्छे योग गुरु का से सलाह लेनी चाहिए। गुरु आपको क्रिया योग विधि को सही तरीके से सिखाएंगे और मार्गदर्शन करेंगे।

आसन से शुरूआत करें:

क्रिया योग करने की शुरुआत हल्के योग आसनों से की जाती है जो शरीर को लचीला बनाएं और शरीर व दिमाग पर ज्यादा जोर ना दें, ऐसे में योग गुरु सही आसनों को करने में आपकी सहायता करते हैं।

प्राणायाम भी जरूर करें:

प्राणायाम क्रिया योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह श्वास और प्राण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी होता है जिससे व्यक्ति को आत्मा शांति मिलती करता है।

मंत्र जाप करना भी जरूरी:

kriya yoga को करने के लिए मंत्र जाप को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि मंत्र जाप से व्यक्ति अपने फोकस को एक जगह लगा सकता है तथा इस तरह वह सही प्रकार से योग क्रिया करने में क्षमता प्राप्त करता है।

क्रिया योग के लिए आपको कौन से मंत्र का जाप करना है तथा किस तरह से आपको यह जाप करना चाहिए इसके बारे में सद्गुरु आपको सही से सीख पाएंगे।

ध्यान करें:

इस योग को करने में ध्यान का भी एक महत्वपूर्ण रोल होता है तो जब आप इस क्रिया विधि को सिखाते हैं तो ध्यान भी सिखाया जाता है ताकि आप अपना कंसंट्रेट लेवल बेहतर बना पाएं

आध्यात्मिक अभ्यास:

क्रिया योग का उद्देश्य व्यक्ति को आत्मा की शक्ति का अनुभव करना होता है व्यक्ति अपनी सच्चाई को समझ पाता है इसीलिए इसे आध्यात्मिक अभ्यास का योग भी कहा जाता है।

Kriya yoga धीरे-धीरे करें और समय-समय पर अपने गुरु से सलाह लें। यह योग के साथ-साथ आत्मा के आध्यात्मिक विकास की दिशा में मदद कर सकता है।

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क्रिया योग दीक्षा कैसे प्राप्त करें?

क्रिया योग दीक्षा की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को प्रामाणिक क्रिया योग को सीखने के लिए सीधे परमहंस प्रज्ञानानंद या उनके किसी अधिकृत योगाचार्य से लेनी चाहिए।

शिक्षाओं की इस श्रृंखला के क्रिया योग को सीखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से कोई पत्राचार पाठ्यक्रम या पाठ उपलब्ध नहीं हैं।

क्रिया योग करने में कितना समय लगता है?

क्रिया योग करने में आपको प्रतिदिन डेढ़ घंटे का दैनिक ध्यान अभ्यास करना चाहिए।

इस तरह नियमित क्रिया अभ्यास से आने वाली शक्तिशाली ऊर्जा को एडजस्ट नहीं किया जा सकता। अध्ययन और तैयारी के पाठ्यक्रम में सामान्यतः लगभग एक वर्ष का समय लगता है। जब आप क्रिया योग की दीक्षा लेते हैं,

क्या क्रिया योग ठीक हो सकता है?

हां क्रिया योग ठीक प्रकार से किया जा सकता है उसके लिए आपको गुरु की देखभाल में इस योगविधि को करना चाहिए।

यह मानसिक हेल्थ और शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है साथ ही यह गहन ध्यान की स्थिति को भी खोलता है। क्रिया योग श्वास, विचार और जागरूकता को संरेखित करता है।

यह योग संरेखण जीवन में भावनाओं और इमोशनल मुद्दों को संतुलित बनाता है। क्रिया योग श्वास पद्धतियों का समूह है।

क्या क्रिया योग शक्तिशाली है?

kriya yoga आध्यात्मिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है यह बहुत शक्तिशाली योग विधि है इसके माध्यम से व्यक्ति ईश्वर के निकट आता है इसे किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाता लगभग सभी धर्म के साधन इस क्रिया विधि को करते हैं।

पुराने समय से ही कृपया योग की शिक्षा शिक्षक द्वारा अपने विद्यार्थियों को दी जाती है यह साल दर साल तेजी से फैल रहा है लोग इसके बारे में जिज्ञासु हो रहे हैं और इसे सीखना चाहते हैं।

मुझे क्रिया योग दीक्षा कहां मिल सकती है?

क्रिया योग दीक्षा किसी स्कूल में नहीं दी जाती ना ही इसके लिए जगह-जगह पर आश्रम की व्यवस्था है इसे आप केवल एक सद्गुरु से ही प्राप्त कर सकते हैं।

क्योंकि यह केवल एक विधि नहीं है बल्कि कई विधियों का एक समूह है इसीलिए इसे करने के लिए या सीखने के लिए एक परम अनुभव वाले गुरु की आवश्यकता होती है जिन्हें इस क्रिया योग के बारे में गहन ज्ञान हो।

तो यदि आप kriya yoga को सीखने के इच्छुक हैं तो आपको ऐसे गुरु के पास जाना चाहिए जो काफी समय से इस विधि को करते हैं और शिष्यों को सिखाते हैं जो अनुभवी हो ताकि वह आपका सही मार्गदर्शन कर सकें।

ऐसा केवल एक सद्गुरु कर सकते हैं तो आपको किसी सद्गुरु के पास जाकर इस क्रिया विधि की दीक्षा लेनी चाहिए क्योंकि सद्गुरु इस क्रिया विधि को गहराई से समझते हैं तो वह आपको इसकी सही शिक्षा दे पाएंगे।

पतंजलि के अनुसार क्रिया योग क्या है?

पतंजलि के अनुसार क्रिया योग – इस योग का उद्देश्य आत्म-अज्ञानता में निहित दुःख के कारणों को बेअसर करना और आपको आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाना है।

पतंजलि के अनुसार क्रिया योग में तीन अभ्यास शामिल किए गए हैं पहला – तप या आध्यात्मिक अनुशासन दूसरा – स्वाध्याय व तीसरा – ईश्वर प्रणिधान अर्थात भगवान के प्रति समर्पण होना।

क्रिया योग कितने साल का है?

क्रिया योग की उम्र की कोई निश्चित सीमा नहीं होती। इस योग का अभ्यास किसी भी आयु में शुरू किया जा सकता है, जब आपको इसे शुरू करने का इच्छा हो आप क्रिया योग कर सकते हैं।

यह योग की प्रक्रिया है, और इसके अभ्यास का समय आपकी साधना और आत्मा के साथ जुड़ने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। बहुत से लोग क्रिया योग को बचपन से ही आरंभ करते हैं, जबकि दूसरे योगी इसे बड़ी उम्र में अपने जीवन में शामिल करते हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि kriya yoga के अभ्यास के लिए आपको एक गुरु या अध्यात्मिक मार्गदर्शक की जरूरत हो सकती है, जो आपको सही तरीके से इसे सीखने में मदद कर सकते हैं।

kriya yoga को शुरू करने का दावा लगभग 1861 में किया जाता है ऐसा माना जाता है कि एक गुरु महावतार बाबा जी द्वारा क्रिया योग विधि को शुरू किया गया था और आधुनिक समय में लाहिड़ी महाशय द्वारा फिर से इस योग क्रिया प्रणाली को पुनर्जीवित किया गया है।

Saniya Qureshi is a Health and Beauty writer, senior consultant and health educator with over 5 years of experience.

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