दशमूलारिष्ट और अशोकारिष्ट में क्या अंतर है?

दशमूलारिष्ट और अशोकारिष्ट दोनों ही आयुर्वेदिक औषधि हैं इनका इस्तेमाल महिलाओं की समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है विशेष रूप से यह दवाई महिलाओं के लिए पीरियड में आ रही दिक्कत और गर्भधारण करने में आ रही दिक्कत के लिए use की जाती है। लेकिन इनमें थोड़ा अंतर है।

दशमूलारिष्ट और अशोकारिष्ट में क्या अंतर है?

दशमूलारिष्ट और अशोकारिष्ट में क्या अंतर है?
दशमूलारिष्ट और अशोकारिष्ट में क्या अंतर है?

दशमूलारिष्ट सामग्री:

दशमूलारिष्ट को 10 मूल आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग करके बनाया जाता है जिनमें बिल्व, आग्निमूळ, गम्भारी मूल, शालपर्णी, पाठा, पत्री, श्यामाकी, वृद्धदारु, गोक्षुर, विदारी, नगरमोथा, श्यामकी, नागकेशर, राजबृंद, द्राक्ष, विदारी, खट्वारी, तालीसपत्र, शतावरी, नीम, इत्यादि शामिल हो सकते हैं।

इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल स्त्री रोग के समाधान के लिए किया जाता है यह सभी पुराने समय से ही महिलाओं की समस्याओं को ठीक करने में इस्तेमाल होती हैं।

अशोकारिष्ट सामग्री:

अशोकारिष्ट में Dashmularishta से अलग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है या फिर जो इसकी मूल सामग्री होती है वह तो अलग होती है इसमें विशेष रूप अशोक छाल, दशमूल, मन्जिष्ठा, हरिताकी, बिभीतकी, अमलकी, नगरमोथा, धातकी, शतावरी, लोध्र, गुड़, यवाग, द्राक्ष, इत्यादि शामिल हो सकते हैं।

दशमूलारिष्ट के उपयोग:

दशमूलारिष्ट का उपयोग महिलाओं के प्रसूति के बाद, श्वासरोग, बालरोग, और स्त्रीरोग में किया जा सकता है।

अशोकारिष्ट के उपयोग:

इन सभी सामग्री का उपयोग महिलाओं की मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता है और गर्भाशय की समस्याओं का इलाज करने के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है विशेष रूप से पीरियड में अनियमित और तेज दर्द के लिए अशोकारिष्ट बेहद अच्छा माना जाता है।

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दशमूलारिष्ट के फायदे:

प्रेगनेंसी के बाद दशमूलारिष्ट का सेवन करने से महिलाओं की शक्ति बढ़ती है स्वास्थ्य सुधार होता है लेकिन इस्तेमाल हमेशा चिकित्सक की निगरानी में ही करना चाहिए।

अगर किसी को सांस से जुड़ी समस्याएं हैं तो उनके लिए भी यह फायदेमंद होता है क्योंकि इसका इस्तेमाल अस्थमा रोगी को ठीक करने के लिए किया जा सकता है।

बच्चों की समस्याओं जैसे कुपोषण और कमजोरी को दूर करने के लिए दशमूलारिष्ट एक कारगर तरीका है इसका सेवन करने से बच्चों में ताकत बढ़ती है।

महिलाओं की सभी समस्याओं को ठीक करने के लिए दशमूलारिष्ट का इस्तेमाल किया जाता है जैसे की गर्भाशय से संबंधित दिक्कतें और पीरियड में होने वाली प्रॉब्लम्स जो अक्सर महिलाओं को झेलनी पड़ती हैं।

इसका उपयोग स्वास्थ्य की अन्य समस्याओं के लिए भी किया जा सकता है जैसे कि बवासीर, रक्तचाप बढ़ता या घटना और पाचन संबंधी समस्याओं में।

अशोकारिष्ट एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है जिसमें विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों का संयोजन होता है। यह विशेषकर महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं के इलाज में प्रयुक्त होती है। यहां कुछ प्रमुख अशोकारिष्ट के फायदे हैं:

अशोकारिष्ट का सेवन करने से मासिक धर्म की समस्याओं में सुधार होता है जिससे कि अनियमित मासिक धर्म होना पीरियड के दौरान ज्यादा ब्लड लॉस होने की समस्या तेज दर्द या अन्य कोई भी पीरियड से संबंधित समस्या हो को ठीक करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

गर्भाशय से संबंधित प्रॉब्लम को ठीक करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है जैसे कि गर्भाशय में सूजन आ जाना या कोई अन्य संक्रमण की समस्या इस तरह की दिक्कत को ठीक करने के लिए यह उपयोगी माना जाता है।

प्रजनन की समस्याओं को ठीक करने के लिए अशोकारिष्ट एक अच्छा उपाय है जैसे की बांझपन को ठीक करना या प्रजनन हे जोड़ी अन्य समस्याओं के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

हार्मोनल इंबैलेंस को फिर से बैलेंस करने के लिए यह काफी अच्छा उपाय है महिलाओं की शारीरिक स्वास्थ्य और हार्मोन की समस्या को ठीक करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

दशमूलारिष्ट के नुकसान:

दशमूलारिष्ट का ज्यादा उपयोग करने पर परेशानी हो जाती है इसीलिए इसे डॉक्टर की सलाह पर निर्धारित खुराक में लेना चाहिए।

इसका उपयोग ज्यादा मात्रा में करने पर पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

अगर इसेबिना डॉक्टर की सलाह के बिना डॉक्टर की सलाह के लिया जाए तो पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है

किसी भी औषधि का अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट और पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

अशोकारिष्ट के नुकसान :

इस औषधि का इस्तेमाल गर्भपात करने या गर्भावस्था को धारण करने के लिए किया जाता है इसीलिए इसे गर्भावस्था के दौरान लेना सुरक्षित नहीं होता अगर गर्भवती महिला इसे लेती है तो उन्हें नुकसान हो सकता है।

अशोकारिष्ट को ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट और आंतों में समस्याएं हो सकते हैं इसीलिए इसे सीमित मात्रा में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

क्रिया:

दशमूलारिष्ट: शारीरिक और मानसिक तंत्र में स्थिरता लाने के लिए कार्य करता है और वात, पित्त, कफ को बलंस कर सकता है।

अशोकारिष्ट: महिलाओं के गर्भाशय और रक्तवाहिनी के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए कार्य करता है, विशेषकर मासिक धर्म संबंधित समस्याओं में मदद कर सकता है।

सारांश:

दशमूलारिष्ट और अशोकारिष्ट दोनों ही औषधि महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए होती हैं हालांकि इनमें थोड़ा अंतर भी होता है (दशमूलारिष्ट और अशोकारिष्ट में क्या अंतर? है) इनका इस्तेमाल पीरियड प्रॉब्लम और गर्भधारण न कर पाने की दिक्कत में किया जाता है।

लेकिन हमेशा इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना सुरक्षित रहता है और डॉक्टर के द्वारा बताए गए खुराक के अनुसार इनका इस्तेमाल करना चाहिए। विशेषकर यदि वह किसी तरह की बीमारी से पीड़ित है या गर्भवती है।

Saniya Qureshi is a Health and Beauty writer, senior consultant and health educator with over 5 years of experience.

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