प्रेगनेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने के नुकसान | Pregnancy Mein Multani Khane Ke Nuksan

Pregnancy Mein Multani Khane Ke Nuksan
Pregnancy Mein Multani Khane Ke Nuksan

मुल्तानी मिट्टी! मुझे लगता है कि यह लफ्ज़ आपके मुंह में पानी जरूर डाल सकता है क्योंकि इसके टुकड़े और परीक्षण में दोनों ही तीन असाध्य पदार्थ होते हैं जिन्हें आप अपनी तरफ खींच ही लेते हैं आप अपनी आंखों को ही क्यों न खींच लेते हैं।

लेकिन आप अपनी जुबान के ज़ाएके के चलते multani mitti को खाना चुन ही लेते हैं। लेकिन क्या आप यह जानते हैं ऐसा क्यों होता है अगर नहीं तो चलिए मैं आपको बताती हूं यह Craving आपको इसलिए हो सकती है शायद आपको pica syndrome हो सकता है अब यह क्या होता है यह मैं आपको आगे बताऊंगी।

अगर आप एक प्रेग्नेंट महिला है तो आपको मुल्तानी मिट्टी, चौक, कच्चे चावल, खट्टी चीजें और यहां तक की दीपक जैसी चीजें खाने की बहुत Craving होती होगी, या जरूरी नहीं कि आप प्रेग्नेंट ही हो क्योंकि अक्सर कई बार बहुत सी औरतों को मुल्तानी मिट्टी, कच्चे चावल, चौक जैसी चीज खाने की आदत होती है जिसकी वजह से वह इन चीजों को अक्सर खा ही लेती हैं।

लेकिन आपको शायद नहीं पता है ऐसी चीजों को खाने से आपके शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है शायद आप जानते भी नहीं यह आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।

क्या आप जानते हैं? अगर नहीं तो मैं आज इस लेख के जरिए प्रेगनेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने के नुकसान के बारे में बताऊंगी अगर आप एक प्रेगनेंट लेडी हैं या फिर आप कंसीव करने के बारे में सोच रही हैं।

इसके अलावा अपने हाल फिलहाल ही में अपने बच्चों को जन्म दिया है तो आपके लिए यह लेख बहुत ही इनफॉर्मेटिव साबित होने वाला है क्योंकि आज मैं सिर्फ प्रेगनेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने के नुकसान के बारे में बताऊंगी।

तो चलिए जानते हैं की क्या multani mitti खाने से प्रेगनेंसी में केवल सिर्फ प्रेगनेंट लेडी को नुकसान पहुंचता है या फिर बच्चों को भी?

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पिका सिंड्रोम क्या होता है?

प्रेगनेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने से होने वाले नुकसानों को जानने चलिए हम जानते हैं आखिर विकास सिंड्रोम क्या होता है।

पिका सिंड्रोम एक ऐसी परेशानी या बीमारी होती है जिसमें किसी भी इंसान को कोई खास चीज खाने की चाहत होती है जिसमें उसे कोई न कोई चीज खाने का मन करता है अगर यह चीज खाने के लायक हो तो यह परेशानी की बात नहीं है।

लेकिन हां अगर यह चीज खाने के लायक नहीं हो, जैसे राख, मिट्ट, चौक, दीपक वगैरा तो यह एक बहुत बड़ी परेशानी की बात हो सकती है और अगर किसी प्रेगनेंट लेडी को पिका सिंड्रोम जैसी परेशानी है तो यह लेडी और उसके बच्चे दोनों के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। जिसमें इन चीजों के खाने से उन दोनों को गलत असर देखने को मिल सकता है।

मुल्तानी मिट्टी में ऐसा क्या होता है जो प्रेग्नेंट लेडी और उसके बच्चे दोनों को जानलेवा खतरा दे सकता है?

आपको पता है कि मुल्तानी मिट्टी देखने में तो एक बहुत ही हार्ड मिट्टी होती है लेकिन अगर उसको तोड़ा या भिगोया जाए तब उसकी अंदर की चिकनाहट सामने देखने को मिलती है।

जी हां अगर आपने अपने चेहरे पर कभी मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक लगाया हो या इसके अलावा कहीं और भी इसका इस्तेमाल किया हो तो शायद आपने गौर किया होगा की वह इतनी चिकनी होती है कि उसको खाने का जी करता है।

अगर आप नॉर्मल दिनों में या फिर प्रेगनेंसी के दिनों में चिकनी मिट्टी मुल्तानी मिट्टी खाते हैं तो यह आपके पेट में पचती नहीं है 10 परसेंट तो शायद आपकी बॉडी से वेस्ट के जरिए निकल जाता है।

और तकरीबन इसका 90% आपके पेट में धीरे-धीरे करके लेयर बनाकर जम जाता है जिसकी वजह से प्रेगनेंट लेडी और उसके बच्चे दोनों को इसका नुकसान हो सकता है और बच्चा विकलांग भी पैदा हो सकता है।

इसके अलावा एक वक्त ऐसा आता है जब आप जो भी खाना खाते हैं वह भी पच नहीं पाता और आपके वेस्ट के जरिए निकल जाता है जिससे आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और कोई भी नई बीमारी बनने का खतरा बढ़ जाता है। प्रेगनेंसी में इसके अलावा और भी नुकसान हो सकते हैं आईए जानते हैं वह क्या है-

प्रेगनेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने के नुकसान | Pregnancy Mein Multani Khane Ke Nuksan

प्रेगनेंसी एक ऐसा टाइम पीरियड होता है जिसमें आपको बहुत ही ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि आप जो भी खाते या पीते हैं इसका सीधा असर आपके बच्चे पर भी पड़ता है।

इसीलिए आपको एक नहीं बल्कि दो जानों का ख्याल रखना पड़ता है और अगर ऐसे में आप multani mitti खाते हैं तो आपको और आपके बच्चे को यह नुकसान भी हो सकते हैं जो कि आपके और आपके बच्चे के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।

प्रेगनेंट लेडी में मुल्तानी मिट्टी खाने के यह नुकसान हो सकते हैं–

पाचन क्रिया पर असर पड़ना

चाहे कोई लेडी प्रेग्नेंट हो या नहीं उसे ज्यादा रोजाना मुल्तानी मिट्टी खाने से पेट की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है जिसमें की उस महिला की पाचन क्रिया पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा अगर वह महिला कोई खाने की चीज भी खाती है तो मुल्तानी मिट्टी खाने से उसकी पाचन क्रिया पर असर पड़ने की वजह से वह खाना पचता नहीं है।

क्योंकि खाने को पचाने के लिए हमारी बॉडी और पेट में जो जूस बनते हैं वह multani mitti की वजह से बनना बंद हो जाते हैं जो कब्ज भी पैदा कर सकता है जब यह कब्ज बन जाता है तो अगर वह महिला प्रेग्नेंट है तो इसका असर उसके बच्चे पर भी देखने को मिलता है।

पेट की आंतों की काम करने की क्षमता को इफेक्ट करती है

हम जानते हैं हमारे पेट में एक पाचन तंत्र होता है जिसमें यह पूरा सिस्टम हमारा खाना पचाने के लिए जूस तैयार करता है जिसे ग्लूकोस कहते हैं जो हमारे खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर आंतों के जरिए अब्जॉर्ब करता है जिसकी वजह से हमें एनर्जी मिलती है।

इसलिए अगर हम यह गर्भवती महिला कोई भी जरूरत से ज्यादा मुल्तानी मिट्टी खाती है तो वह उसके पेट की आंतों की काम करने की पावर को इफेक्ट करती है क्योंकि यह मुल्तानी मिट्टी धीरे-धीरे करके पेट में जमना शुरू हो जाती है।

और हम जो भी खाना खाते हैं वह इस multani mitti की वजह से पच नहीं पाता है जिसकी वजह से हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है जो प्रेग्नेंट लेडी और उसके बच्चे दोनों को बुरी तरह से प्रभावित करता है।

प्रेगनेंट लेडी की दांतों को नुकसान पहुंच सकता है

मुल्तानी मिट्टी में कुछ ऐसे जहरीले तत्व होते हैं जिसको खाने की वजह से प्रेगनेंट लेडी की दांतों को भी नुकसान पहुंच सकता है और वह नुकसान एक दांत से लेकर सभी दांतों तक बढ़ सकता है और यह समस्या दिन पर दिन बदतर भी हो सकती है।

मुल्तानी मिट्टी खाने से प्रेगनेंट लेडी को पोषण की कमी भी हो सकती है।

जैसे कि मैंने ऊपर बताया मुल्तानी मिट्टी का तकरीबन 90% हिस्सा हमारे पेट में जमना शुरू हो जाता है और यह जमाव इतना बढ़ जाता है कि अगर वह इसके अलावा कोई और खाना भी खाती हैं तो वह पच नहीं पता है।

क्योंकि उसकी आंतें खाने के न्यूट्रिएंट्स अब्जॉर्ब नहीं कर पाती हैं मुल्तानी मिट्टी के वजह से ग्लूकोस जो हमारे खाने को तोड़ने के लिए काम आता है नहीं बन पाता है जिसकी वजह से प्रेगनेंट लेडी को पोषण की कमी कभी सामना करना पड़ जाता है।

और कई बार तो ऐसा होता है कि यह परेशान इतनी बढ़ जाती है कि आपको सिर्फ खाना खाने के बाद उल्टी आती है और वह सारा खाना उल्टी के जरिए निकल जाता है।

मिट्टी में पाए जाने वाले विषैले पदार्थ की वजह से इन्फेक्शन भी हो सकता है।

Multani mitti में से बहुत से जहरीले तत्व पाए जाते हैं जो प्रेगनेंट लेडी के पेट में जानना शुरू हो जाते हैं जिसकी वजह से पेट में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और कोई भी बड़ी बीमारी होने की पॉसिबिलिटी भी बनने लगती है।

पेट में कीड़े भी हो सकते हैं

यह बात तो हम सभी जानते हैं कि किसी भी तरह की मिट्टी खाने से हमारे पेट में कीड़े हो जाते हैं शायद आपने भी अक्सर सुना होगा कि आपके पड़ोस में किसी बच्चे को मिट्टी खाने की लत होती है और वह इतनी ज्यादा बड़ी क्वांटिटी में मिट्टी खाने लगता है कि एक दिन उसके पेट में बहुत बड़े-बड़े कीड़े बनना शुरू हो जाते हैं।

जिसकी वजह से उसके पेट में दर्द जलन जैसी परेशानी होती है ठीक इसी तरह multani mitti के खाने से प्रेगनेंट लेडी के पेट में कीड़े भी हो सकते हैं जिसकी वजह से उसको पेड़ के दर्द जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है जो उसके और उसके बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

मुल्तानी मिट्टी खाने से गर्भवती के पेट में पल रहे बच्चों को होने वाले नुकसान

टाइम से पहले बच्चों के पैदा होने का खतरा बन सकता है

डॉक्टर बताते हैं कि मुल्तानी मिट्टी में ऐसे कई जहरीले पदार्थ होते हैं जिनकी वजह से वह जहरीले पदार्थ मां के साथ-साथ बच्चे को इस तरह से प्रभावित करते हैं कि वह अपने टाइम से पहले ही दुनिया में आ जाता है और आप जानते ही हैं कि टाइम से पहले बच्चे के पैदा होने से क्या-क्या परेशानियां होती हैं जो की पूरी जिंदगी में आपके साथ बनी रह सकती हैं।

पेट में बच्चा मरने की पॉसिबिलिटी भी हो सकती है

इसके अलावा डॉक्टर यह भी बताते हैं की मुल्तानी मिट्टी के प्रेग्नेंट महिला के खाने से इतना गहरा असर देखने को मिलता है कि कई बार बच्चा पैदा होने से पहले ही मन के पेट में मर जाता है।

अगर आप ऐसा नहीं चाहते हैं तो आपको मुल्तानी मिट्टी को नहीं खाना चाहिए बल्कि multani mitti ही नहीं और भी कोई ऐसी विषैली जहरीली चीज नहीं खानी चाहिए जिससे आपको और आपके बच्चे दोनों को किसी भी खतरे का सामना करना पड़े।

मुल्तानी मिट्टी के खाने से कुपोषण होने की वजह से कम वजन के बच्चे का जन्म होना

जैसे की मैंने ऊपर बताया कि मुल्तानी मिट्टी के खाने से प्रेगनेंट लेडी को कुपोषण का शिकार भी बनना पड़ सकता है और जब वह लेडी कुपोषण का शिकार बन जाती है जिसकी वजह से वह कुछ खा पी नहीं पाती है तो इसका कर सीधे बच्चे पर भी देखने को मिलता है।

क्योंकि पेट में पल रहे बच्चे का खाना पीना वही होता है जो उसकी मां खा पी रही होती है वही उसको न्यूट्रिशंस देती है जिसकी वजह से कम वजन के बच्चे पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। हम जानते हैं कम से कम पैदा होने वाले बच्चे का वजन 3 से 4 किलोग्राम के बीच होना चाहिए और मुल्तानी मिट्टी की वजह से उसे बच्चे का वजन 3 किलोग्राम से नीचे ही होता है।

बच्चों में चिड़चिड़ापन भी देखने को मिल सकता है

कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि जब बच्चे टाइम से पहले जन्म ले लेते हैं तो वह नॉर्मल बच्चे की तरह behave नहीं करते हैं उनमें कोई बिहेवियरल इश्यूज होते हैं जिनमें से एक चिड़चिड़ापन होता है ऐसे बच्चे हमेशा रोते बिलखते ही रहते हैं।

विकलांग बच्चा पैदा होने की पॉसिबिलिटी हो सकती है

अगर बच्चा को पोषण का शिकार हो उसे प्रॉपर क्वांटिटी में न्यूट्रिएंट्स नहीं मिल रहे हो तो बच्चे पर बहुत बुरा असर देखने को मिल सकता है जैसे टाइम से पहले बच्चे का पैदा होना चिड़चिड़ा होना या इससे भी बड़ा बच्चों का विकलांग पैदा होना।

जो की एक बहुत ही नापसंद इमोशन हो सकता है जिसे कई बार समाज समिति रिश्तेदार यहां तक की कभी-कभी तो पेरेंट्स भी बच्चों को एक्सेप्ट नहीं करते हैं। ऐसे में वह बच्चों के लिए बहुत ही उदास ना खुश कंडीशन होती है जिसके साथ उसे अपनी पूरी जिंदगी बितानी पड़ती है।

हालांकि वह जानता नहीं है की विकलांग होना कोई जुर्म या अपराध नहीं है इसे सिर्फ समाज समिति ने एक अपराध मान रखा है भले ही समाज बहुत आगे बढ़ गया है लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे परिवार हैं जो अपनी दकियानूसी सोच नहीं बदल रहे हैं हालांकि इसकी बहुत जरूरत है।

निष्कर्ष

अपने इस लेख को इन लफ्जों के साथ खत्म करना चाहूंगी की एक छोटी सी चीज Multani mitti आपकी पूरी जिंदगी पर किस तरह से असर डाल सकती है यह सिर्फ एक प्रेगनेंट लेडी ही नहीं बल्कि बच्चे उसके पूरे परिवार रिश्तेदार दोस्त और यहां तक की समाज पर भी बेमतलब असर डाल सकती है।

अगर आप चाहे तो खुद की बुरी कंडीशंस होने से बचा सकते हैं क्योंकि अगर आपको ऐसी गलत चीजों को खाने की क्रेविंग होती है,

तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि साइंस ने अपनी तरक्की कर ली है कि आपकी craving को चेंज करने के लिए भी ऐसी दवाइयां बल्कि मेडिकेशंस यहां तक की एक्सरसाइज भी है जिनके जरिए आप अपने इस गलत आदत को भी बदल सकते हैं।

इसलिए अगर आप एक प्रेगनेंट लेडी या फिर नॉर्मल कोई भी इंसान चाहे लड़का लड़की बड़ा-बड़ा बच्चा जवान हो और आपको मुल्तानी मिट्टी चौक दीपक गुल्लक की मिट्टी जैसे चीजों को खाने की क्रेविंग है और आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं।

तो बिना सोचे समझे देर किए बना डॉक्टर के पास जाएं और इसका आसन और इफेक्टिव इलाज पाएं।यह इलाज आपके सिर्फ एक फोन कॉल दूर है चाहे तो आप अपने डॉक्टर के साथ मीटिंग ऑनलाइन ऑफलाइन किसी भी मोड में रख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न–

गर्भावस्था के दौरान मुल्तानी मिट्टी खाने का मन क्यों होता है?

गर्भावस्था के दौरान अक्सर गर्भवती महिला को कुछ अजीबो गरीब अलग-अलग चीज जैसे खट्टे फल इमली चौक और यहां तक की मुल्तानी मिट्टी खाने का भी मन होता है डॉक्टर बताते हैं।

इसके होने की वजह हार्मोन बदलने होता है इसके अलावा प्रेगनेंट लेडी में आयरन की कमी हो जाती है जिसकी वजह से उन्हें multani mitti चौक कोयला राख जैसी चीज खाने का मन करता है।

प्रेगनेंसी के दौरान मुल्तानी मिट्टी खाने की समस्या से छुटकारा कैसे पाएं?

अगर आपको प्रेगनेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने की इच्छा होती है तो इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप डॉक्टर से परामर्श जरूर करें जांच पड़ताल के माध्यम से यह जाने की कोशिश करें कि आपके शरीर में कोई पोषक तत्व की कमी तो नहीं है।

क्योंकि अक्सर प्रेगनेंसी में मुल्तानी मिट्टी खाने के कारणों में आयरन की कमी होना माना जाता है अगर ऐसा होता है तो डॉक्टर आपको आयरन और जिंक से भरपूर मात्रा का खाना खाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे जिससे आप में आयरन की कमी दूर हो जाए और आपका multani mitti खाने का मन ना करें।

भुनी हुई मुल्तानी मिट्टी के खाने से क्या होता है?

भुने हुए मुल्तानी मिट्टी के खाने से पाचन क्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसकी वजह से खाना ठीक से पांच नहीं पता और या तो आपको भूख लगती बंद हो जाती है या बहुत ही कम लगती है।

क्या मैं प्रेगनेंसी में मुल्तानी मिट्टी खा सकती हूं?

प्रेगनेंसी के दौरान मुल्तानी मिट्टी खाना बिल्कुल भी सेफ नहीं माना जाता है क्योंकि इससे स्वास्थ्य और पेट संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती है इसके अलावा यह आंतों और पाचन शक्ति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

मुल्तानी मिट्टी खाने की आदत कैसे छोड़े?

मुल्तानी मिट्टी खाने की आदत को छुड़ाने के लिए डॉक्टर लॉन्ग को बहुत ही ज्यादा जरूरी बताते हैं इसके लिए आपको एक कप पानी में कुछ लौंग डालकर धीमी आंच पर पकाना होगा और उसे ठंडा करना होगा।

इसके बाद कम से कम दिन में तीन बार यह पानी आपको पीना होगा इसके साथ आप अपनी डाइट में घी भी शामिल कर सकते हैं जिससे कि आपको मुल्तानी मिट्टी की खाने की आदत से छुटकारा मिल जाए।

Saniya Qureshi is a Health and Beauty writer, senior consultant and health educator with over 5 years of experience.

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