80% लोग दुखी क्यों हैं? (मनोवैज्ञानिक से जानें)

80% लोग दुखी क्यों हैं : जीवन में सुख-दुख हवा के झोंके की तरह है जो हमारे जीवन में आते जाते रहते हैं कभी-कभी हमें ऐसी सिचुएशन को झेलना पड़ता है जिसका अंदाजा भी नहीं होता। सुख के समय पर हम खुश होते हैं और दुख आने पर दुखी हो जाते हैं पर दुखों के आने का कारण क्या है?

80% लोग दुखी क्यों हैं?|Why people live sad in hindi.

ज्यादातर लोग दुखी होते हैं क्योंकि लोग अपनी आदतों के गुलाम बन चुके हैं इंसान की आदतें ही उसका भविष्य तय करती हैं अगर आदत अच्छी होगी तो भविष्य बेहतर बनता है और आदत खराब होने पर भविष्य भी खराब हो जाता है।

हर इंसान दुख और सुख दोनों ही तरह की जिंदगी जीता है लेकिन इंसान खुद अपने दुखों को बढ़ाता है और छोटे से दुख में फस कर रह जाता है और अपने इस दुखों के जाल को खोल नहीं पाता।

लेकिन व्यक्ति अपने अच्छे कर्मों से ही खुशी ले सकता है अगर आदर्शों पर चलकर सही रास्ता चुनें। हो सकता है रास्ता कठिन हो लेकिन जब व्यक्ति सही रास्ते पर होता है तो वह हमेशा आत्मीय रूप से प्रसन्न रहता है।

सुख कभी बाहरी किसी भी चीज से प्राप्त नहीं किया जा सकता। सच्ची खुशी व्यक्ति केवल अपने अंतर्मन से ही प्राप्त कर सकता है उसके लिए उसे अपने मन की खुशी को महसूस करना होगा। ऐसा तभी हो सकता है जब व्यक्ति कठिन ही सही, लेकिन हमेशा सही रास्ता चुनें।

क्या हम सब दुखी हैं?(80% लोग दुखी क्यों हैं।)

दुखी होने की कोई एक वजह नहीं है व्यक्ति छोटी-छोटी चीजों पर दुखी हो जाता है अगर कोई मनचाही चीज को हासिल नहीं कर पाता तो वह उस चीज के बारे में सोचते रहने की वजह से खुद को हमेशा दुखी करता रहता है।

हर किसी के पास अपना अपना दुख है और व्यक्ति अपना दुख दूसरों को सुना कर यह जताने का प्रयास करता है कि उसका दुख सबसे बड़ा है जबकि दुनिया में कोई एक इंसान दुखी नहीं है हम सब ही किसी ना किसी कारणवश दुखी है।

अधिकतर लोग अपनी इच्छाओं के कारण ही दुखी होते हैं अक्सर हम दूसरों से बड़ी बड़ी उम्मीदें लगा बैठते हैं इसके अलावा हम अपने प्रयासों का फल जल्दी पाने और ज्यादा पाने के लिए चिंतित रहते हैं।

यदि हमें हमारा मनचाहा फल नहीं मिलता तो हमारा मन उदास हो जाता है और जिंदगी दुखी प्रतीत होती है इसलिए जरूरी है कि हम यह बात याद रखें। कि हम अपनी अपेक्षाओं को कम करके ही अपने दुखों को कम कर सकते हैं।

आज के समय में दुख एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जिससे अनुमानित रूप से पूरा विश्व प्रभावित है कोई भी सच्चा सुख महसूस करने में समर्थ नहीं है।

अवसाद (80% लोग दुखी क्यों हैं?)

• इसे हम अवसाद के रूप में भी देखते हैं 3.8% लोग पूरे विश्व में अवसाद से ग्रस्त हैं जिसमें सबसे ज्यादा व्यस्क शामिल है व्यस्क 5.7% इस बीमारी से जूझ रहे हैं।

• दुनिया में लगभग 280 मिलियन लोग डिप्रेशन का शिकार है डिप्रेशन सामान्य मनुष्य में उतार-चढ़ाव और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में आ रही चुनौतियों की वजह से उत्पन्न होता है।

• जब अवसाद एक गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है तो इससे प्रभावित लोगों को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है जिस वजह से वह अपनी लाइफ को Enjoy करने के बजाए Destroy करने लगता है।

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दुःख के वैज्ञानिक कारण:

डिप्रेशन का कोई एक कारण नहीं होता है। यह कई कारणों से हो सकता है और इसके कई अलग-अलग ट्रिगर हैं।

लोगों के लिए, एक परेशान या तनावपूर्ण जीवन घटना, जैसे शोक, तलाक, बीमारी, अतिरेक और नौकरी या पैसे की चिंता, दुख के कारण हो सकते हैं।

लोगों को तनावपूर्ण घटनाओं से निपटने में समय लगता है जिस वजह से वो अपना जीवन दुख में बताते रहते हैं यह तनावपूर्ण स्थिति की वजह रिश्ते टूट जाना या फाइनेंसियल नुकसान होना, अधिकतर देखा गया है।

80% लोग दुखी क्यों हैं?|Why people live sad in hindi.

जो व्यक्ति तनावपूर्ण घटनाओं से ग्रसित होता है उसके उदास रहने का खतरा बढ़ जाता है यदि आप अपने दोस्तों को अपने दुख नहीं बता पाते और अपनी समस्या को खुद ही सुलझाने का प्रयास करते हैं तो आप ज्यादा दुखों को महसूस करते हैं।

1. व्यक्तित्व | Personality

अगर हमारे अंदर कुछ पर्सनैलिटी से जुड़े लक्षण है जो हमें sad feel कराते हैं जैसे आत्मसम्मान की कमी, लोगों से अपने बारे में आलोचनात्मक बातें सुनना तो ऐसे में दुखी होने की संभावना ज्यादा संवेदनशील हो सकती है।

यह सब अनुवांशिकता के कारण या फिर जीवन के अनुभव की वजह से हो सकता है।

2. पारिवारिक इतिहास | Family history

अगर आपकी फैमिली में कुछ ऐसी घटना घटी है जो आपको बार-बार दुखी कर देती है जैसे माता पिता भाई बहन के साथ कोई घटना हो जाना, जीवन साथी से बिछड़ जाना तो ऐसे में भी व्यक्ति दुखी रहने लगता है और संभावना रहती है कि आप अपने दुख को विकसित करेंगे।

3. तनावपूर्ण अवसर | Stressful Events

बहुत लोग तनाव पूर्ण घटनाओं के कारण खुद को पछतावे में रखते हैं और हमेशा stress में रहने की वजह से वह खुद को निराशाजनक स्थिति में ले जाते हैं।

4. जन्म देना | Giving Birth

प्रेगनेंसी के बात के समय में अधिकतर महिलाएं विशेष रूप से खुद को अवसाद की स्थिति में महसूस करती हैं क्योंकि ऐसे समय में उन्हें बहुत ज्यादा हार्मोनल शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। साथ ही एक नए जीवन की अतिरिक्त जिम्मेदारी, प्रसवोत्तर अवसाद का कारण बन सकती है।

5. अकेलापन | Loneliness

परिवार दोस्तों और अपने संबंधों से कट जाने के कारण अकेलेपन की भावना आती है जो आपके दुख के जोखिम को बढ़ा सकती है।

6. शराब और ड्रग्स | Alcohol and drugs

जब जीवन में दुख आता है तो कुछ लोग बहुत अधिक शराब पीने लगते हैं अपने दुखों से निपटने की कोशिश करते हैं उसके परिणाम स्वरुप व्यक्ति खुद को और ज्यादा बुरी स्थिति में ले जाते है।

किसी भी तरह का नशा आपको आराम देने में मदद कर सकता है लेकिन यह दुख धीरे-धीरे बढ़ जाता है खासकर किशोरावस्था में लोग इस तरह का रास्ता चुनते हैं।

शराब पीकर दुख को कुछ समय के लिए भुलाया तो जा सकता है लेकिन इसे हमेशा के लिए दिल से निकालना संभव नहीं हैं इसीलिए किसी भी दुख को घटाने या कम करने के लिए शराब का सहारा नहीं लेना चाहिए।

शराब दिमाग के रसायन विज्ञान को प्रभावित करती है जिस कारण व्यक्ति अवसाद की ओर बढ़ता जाता है।

7. बीमारी | Illness

लंबे समय तक किसी जानलेवा बीमारी से ग्रस्त होने पर जैसे हृदय से संबंधित बीमारी, कैंसर, मस्तिष्क से संबंधित कोई बीमारी जिंदगी में दुख को ज्यादा बड़ा देती हैं।

किसी प्रकार की चोट दुख को बढ़ाने की वजह हो सकती है विशेषकर सिर पर लगी चोट अवसाद का कारण बन सकती हैं क्योंकि सिर पर लगी चोट मिजाज और भावनात्मक समस्याओं को ट्रिगर कर कर सकती हैं।

अधिकतर लोगों को उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्याओं के कारण एक निष्क्रिय थायराइड, हाइपो थायराइड हो सकता है।

कमजोर मामलों में सिर पर लगी मामूली चोट पिट्यूटरी ग्रंथ को नुकसान पहुंचा शक्ति है जो एक मटर के आकार की ग्रंथि होती है यह थायराइड उत्तेजक हार्मोन का उत्पादन करने के लिए जिम्मेदार होती हैं।

इससे कई तरह के लक्षण पैदा हो सकते हैं जिनके कारण व्यक्ति खुद को दुखी महसूस करता है जैसे जल्दी थ पैसा सुखद क्या है दूसरों को हमें दूसरोंकान हो जाना, तनावपूर्ण स्थिति में रहना आदि।

आज के टाइम में लोग बहुत ज्यादा व्यस्त रहने लगे हैं अगर गांव की बात करें तो उन्हें कार्य करने के लिए शहर जाना पड़ता है जिसके लिए उन्हें बार-बार कभी शहर और कभी गांव आना आने जाना होता है।

जिसके बाद उन्हें अपने परिवार के बारे में सोचने तथा परिवार से बातें करने उनके लिए समय निकालने आदि का समय नहीं मिल पाता।

इंसान खुद को बहुत ज्यादा बेबस महसूस करता है और एक दुख की स्तिथि में रहने लगता है।

किस प्रकार के लोग हमेशा दुखी ही रहते हैं?

मनुष्य वह है जो अपने मन को संसार से जोड़ देता है संस्कृत ग्रंथों में दुनिया के लिए संसार और जगत 2 शब्दों का उल्लेख देखा गया है जगत सृष्टि की रचना है और संसार हम लोग बनाते हैं।

संसार में हम रिश्ते भी बनाते हैं जैसे भाई-बहन पति-पत्नी बच्चे माता-पिता और अन्य रिश्तेदार जिनसे हम खुद को बहुत ज्यादा मजबूती से जोड़ लेते है।

यह सब हमारा खुद का बनाया हुआ हमारा खुद का रचा हुआ संसार है।

इस संसार में जिन लोगों से हम जुड़े होते हैं उनके दुखों को या उनके साथ हो रहे बुरे से हमें फर्क पड़ता है। वरना जब आप इसे पढ़ रहे हैं उसी क्षण में दुनिया में लाखों लोग मरे भी होंगे और पैदा भी हुए होंगे।

लेकिन आपको उनके लिए किसी भी तरह की भावना महसूस नहीं होती, क्योंकि आप उनसे किसी भी तरह से खुद को नहीं जोड़ते।

इसका मतलब यह है कि हम अपने मन को जब संसार में जोड़ लेते हैं तभी हम दुखों को भी खुद से जोड़ लेते हैं। और अगर हम संसार में आए हैं तो हमें दुखों को भी अपनाना होगा और सुखों को भी जीवन में लाना होगा।

सुख दुख यूं ही नहीं आते।

यह हमारे कर्मों के फल होते हैं।

संसार में दुख और सुख दोनों ही है लोभी और अहंकारी गुस्सा, मोह, वासना, पाप, कामना यह सब एक ही परिवार की प्रवृत्ति पाई जाती हैं जैसे घमंडी इंसान को गुस्सा ज्यादा आता है।

उसको मोह भी अधिक होता है उसकी आंखों में वासना देखी जा सकती है उसकी कामनाएं बढ़ती जाती हैं और अगर उसकी कामना पूरी ना हो तो वह पाप करने से भी नहीं डरता।

उदाहरण के लिए रावण अहंकारी था उसे गुस्सा भी आता था उसका भाई कुंभकरण मोह में रहता था उसका बेटा मेघनाथ वासना में रहता था। जो व्यक्ति क्रोध वासना आदि जैसी बुरी आदतों में रहकर संसार में पड़ा रहता है वह हमेशा दुखी ही रहता है।

दूसरों को दुखी करना इतना सुखद क्यों है?

दूसरों को दुख देकर हमें खुशी मिल सकती है। यह हमारा एक वहम है क्योंकि हर व्यक्ति एक दूसरे जुड़ा हुआ है संसार में हम भले ही अलग अलग शरीर के रूप में पैदा होते हैं लेकिन भगवान के लिए हम सब एक ही है।

दूसरों को दुख देकर हम खुश हैं यह सब हमारा भ्रम से यह सारी किताबी बातें हैं और इनमें किसी भी तरह की वास्तविकता की जगह नहीं है।

अगर आप किसी दूसरे व्यक्ति को दुखी करने के बारे में सोच रहे हैं तो सबसे पहले उसका प्रभाव आप खुद पर महसूस कर सकते हैं।

आप किसी और को किसी भी तरह का दुख देने के बारे में विचार कर रहे हैं तो आप भी उससे दूर नहीं रह सकते उस दुख को आप भी अनुभव करेंगे।

विचार करके देखें जैसे अगर आप किसी को गाली देकर या मारपीट कर दुखी करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपके विचार दूषित होते हैं। आप के भाव बुरे बनते हैं आपका व्यक्तित्व गंदा होता है। आप खुद को दूसरों के सामने गलत तरीके से जाहिर कर रहे होते हैं।

सामने वाले को आप किसी प्रकार से प्रभावित करने से पहले खुद पर उसका असर देख पाएंगे। आप दूसरों को दुखी करके खुश रह सकते हैं इस तरह की गलतफहमी में रहने वाले लोग अक्सर दुखी होते हैं।

पर इसके विपरीत जो लोग यह समझते हैं कि वह दूसरों को दुखी करके खुद कभी भी सुख नहीं पा सकते वह लोग हमेशा लोगों को खुश रखने का प्रयास करते हैं। और वाकई जब वह दूसरों को खुशी देते हैं तो खुद भी पहले उस खुशी को महसूस करते हैं।

ऐसे लोगों को हम होशपूर्ण जीवन जीने वाले कह सकते हैं उनको उनकी मर्जी के खिलाफ कोई अन्य दुखी नहीं कर सकता।

ऐसे होशपूर्ण लोगों को अगर कोई सामने वाला किसी तरह का दुख पहुंचाने वाले शब्द कहता है तो होशपूर्ण व्यक्ति समझदारी से सुनता है देखता है कि सामने वाला उसके लिए कैसे शब्द बोल रहा है शब्दों को शांति से सुनता है और धन्यवाद देकर आगे बढ़ जाता है।

क्योंकि शब्द व्यक्ति की परिधि तक पहुंच सकते हैं उसकी गहराई से शब्दों का लेना देना नहीं है। गहन शांति वाले व्यक्ति को कोई भी दुखी नहीं कर सकता। इसलिए जागने की तरफ ध्यान दीजिए और दुनियादारी में फंसने के बजाय अपने जीवन को नया नजरिया देने पर ध्यान दें।

दूसरों को दुखी और मायूस देखकर आप खुद को ही वास्तव में दुखी कर रहे होते हैं। किसी के बारे में बुरा सोचने से पहले अपने बारे में सोच लीजिए, कि उसका प्रभाव पहले आप पर भी होगा। शायद आपको वह प्रभाव तत्काल महसूस ना हो लेकिन सही समय पर आपके सामने जरूर आएगा।

क्यों और कब हम दुखी हो जाते हैं?

जब आप बात बात पर खुद को बड़ा जताने का प्रयास करते हैं खुद को श्रेष्ठ जताते हैं दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं। अपनी गलती ना मानकर और अपनी बात से पलट जाते हैं।

किसी भी बात को झूठा रो कर सच बना देते हैं। दूसरों से बहस करने की गंदी आदत बना लेते हैं, तो लोग आपसे जल्दी ही दुखी हो जाते हैं और आप से दूर रहने के बहाने ढूंढने लगते हैं।

जो चीज आपको बुरी लगती है वे दूसरे के साथ कभी मत करो। अगर आप किसी के साथ ऐसा कुछ करते हो जो आपके लिए बुरा है तो फिर आप किसी से उदारता की उम्मीद न रखें।

किसी को नीचा दिखाना। कुछ लोगों को लगता है ऐसा करने से उन्हें खुशी मिलेगी लेकिन ऐसा करने से आप खुश नहीं होते बल्कि अपने मन में शर्मिंदगी महसूस करते हैं।

जब हम किसी से हार जाते हैं तो हमारा मन उदास हो जाता है हम दुखी हो जाते हैं ऐसा क्यों होता है।

इसलिए होता है क्योंकि हमारी उम्मीद पूरी नहीं हो पाती उसका कारण कोई और नहीं होता हम ही होते है क्योंकि हम हार मान जाते हैं।

क्योंकि आपको जब तक कोई नहीं हरा सकता जब तक आप हार ना मान लो। हो सकता है आप बहुत चीजों में हार जाए लेकिन दोबारा कोशिश करनी चाहिए।

चिंता करने की बजाय आगे बढ़ते जाओ क्योंकि जीवन में जीतना तो तय है अगर आप सच्चे मन से कोशिश करोगे।

व्यक्ति सिर्फ जीत पर ध्यान लगाता है हार को अपनाने से डरता है जबकि जरूरी है की जीत के साथ हार को भी समझे। जीत हार एक सिक्के के दो पहलू हैं हो सकता है अभी हार मिली है पर जीतने के भी चांसेस है।

यह सोचने बजाय कि हम हार गए हैं जीतने की नई कोशिश करो। सफलता उसे नहीं मिलती जो हारता नहीं है बल्कि सफलता उसे मिलती है जो हार नहीं मानता।

क्यों हम दुखी होने पर मां को याद करते हैं?

इंसान अपने दुखों में हमेशा मां को याद करता है क्योंकि मां भगवान का रूप होती है वह हमेशा बच्चों दुखों को कम करने का प्रयास करती हैं जबकि मां के अलावा ऐसा कोई नहीं है जो उसे और उसके दुख को समझे।

इसलिए कोई भी उम्र हो व्यक्ति हमेशा अपनी मां के साथ रहना चाहता है। मां बच्चों के दुखों को अपना दुख समझती है उसके लिए दुआ करती है।

दुनिया में सब कुछ पाने के लिए हमें कुछ ना कुछ लेना देना पड़ता है लेकिन मां का प्यार ऐसा होता है जिसके बदले हमें कभी भी कुछ चुकाने की जरूरत नहीं होती यह अनमोल होता है। इसलिए दुखों के समय में मां याद आती है।

हमें दूसरे लोग खुद से ज्यादा खुश क्यों लगते हैं।

व्यक्ति की प्रवृत्ति है वह हमेशा यह सोचता है कि सिर्फ उसे ही दुख हैं और सभी बहुत खुश हैं और आज के समय में व्यक्ति खुद के दुख से दुखी नहीं हो रहा है दूसरों के सुखों को देख कर दुखी हो जाता है।

हर कोई एक दूसरे को नीचा दिखाना चाहता है दूसरों की खुशियों को बर्दाश्त नहीं कर पाता। उसको नुकसान पहुंचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

जिस के पास जो कुछ है वह खुद से सेटिस्फाइड नहीं होता। जिस कारण वे खुशी को खुद से दूर करता रहता है। और हमेशा अपनी खुशियों को दूसरों में ढूंढता रहता है।

ऐसे व्यक्ति खुशियों के लिए दूसरों पर निर्भर होता है और जो दूसरों पर निर्भर होता है वह कभी खुशी नहीं पाता।

जीवन में बहुत लोग ऐसे होते हैं जो दिखाते हैं कि उन्हें आपकी परवाह है जिस वजह से हमारी उम्मीदें उनसे बढ़ने लगती हैं जबकि वास्तव में उन्हें हमारे सुख दुख से कोई फर्क नहीं पड़ता है। आज के समय में हर कोई एक दूसरे की चिंता करने के नाम पर धोखेबाजी करता हैं।

लोग सिर्फ खुद के काम के लिए प्यार से बोलते हैं और जब अपना काम निकल जाता है तो इंसान बदल जाता है।

इस जमाने में हर चीज बिकने लगी है कोई किसी की कीमत नहीं समझता। लोगों की जरूरतें हर रोज बढ़ती जा रही हैं।

जो लोग धोखा खाते हैं वह तो दुखी होते ही हैं जो लोग धोखा देते हैं उनके मन मे भी हमेशा उनसे कुछ गलत हुआ है की भावना रहती हैं।

दुखों का मूल कारण है हमारी इच्छाएं (80% लोग दुखी क्यों हैं?)

इच्छाएं – दुखों का सबसे बड़ा मूल कारण हमारी इच्छा हैं हम अपनी इच्छाएं बनाते रहते हैं जो पूरी नहीं हो पाती तो इस वजह से हम कभी भी संतुष्टिपूर्ण जीवन नहीं जी पाते। यही है जिंदगी का सबसे बड़ा दुख।

और यह इसलिए होता है क्योंकि हम हमेशा ज्यादा पाने की लालसा रखते हैं। जबकि हमें जो हमारे पास हैं उसी में संतुष्ट रहना चाहिए और उम्मीद खुद की मेहनत पर लगानी चाहिए। हमें अपनी ख्वाहिशों को अपने दम पर पुरा करना चाहिए।

अगर लोग उनके पास जो होता है उसी में संतुष्ट रहते हैं तो वे कभी जीवन में दुखी नहीं होते। दुखी होने का मूल कारण ही हमारी आकांक्षाएं होती हैं।

हमारी आकांक्षाएं जितनी बढ़ती है हमारा दुख भी उतना ही बढ़ता है इसलिए आकांक्षाओं पर काबू रखना जरुरी है।

ऐसा नहीं है कि आप किसी चीज को पाने की इच्छा ना रखें। लेकिन कोई भी उम्मीद दूसरों से न रखें अपनी उम्मीदें खुद से रखें जो आप पूरा कर सकते हैं।

अगर आप दुखी हैं तो क्या करें?

खुद को खुश रखने का हुनर सिर्फ हमारे पास है संसार में ऐसा कोई नहीं है जो हमें कोई भी दुख या खुशी महसूस कराएं जब तक हम खुद अपने मन से खुशी को महसूस ना करें।

आप खुश रहने का प्रयत्न करें इस संसार में एक ही व्यक्ति है जो आपको खुश रख सकता है और वो हैं- आप खुद

कुछ टिप्स आशा है आपके काम आएंगे–

• अपने से गरीब लोगों की तरफ देखे।

• आपकी जो कोई समस्या है उसका समाधान ढूंढने की कोशिश करें।

• अपनी पसंद के काम करें जैसे बागबानी, पेंटिंग,गाने सुनना मूवी देखना… आदि

• करीबी दोस्त या जो भी कोई आपको अच्छा लगता है आप उसके पास बैठ कर बातें करें।

• अकेले कमरे में ना रह कर लोगों से बातें करें, बाहर जाएं वातावरण में समय बिताएं।

• कुदरत के द्वारा बनाए गए नजारों को देखिए यह संसार प्राकृतिक नजारों से भरा पड़ा है।

• यह भी समझे कि आप इंसान हैं जिसे ईश्वर ने हर जीव जंतु से ज्यादा क्षमता दी है यह जीवन बार-बार नहीं मिलता। कीट पतंगे कीड़े मकोड़े इनकी जिंदगी को देखिए फिर अपनी जिंदगी के महत्व को समझिए।

दुखी होने से खुद को बचाने के तरीके:

दुख की स्थिति से बचने के लिए आप इन तरीकों को आजमा सकते हैं।

• सुबह उठकर सूरज की रोशनी में एक्सरसाइज कीजिए।

• संतुलित जीवन यापन की आदत बनाएं।

• संतुलित आहार खाएं।

• अनुशासन का पालन करें।

• समय पर उठो और समय पर सोने की आदत बनाएं।

• तनावपूर्ण स्थिति‌ से खुद को दूर रखें।

• उसे खाएं जो आपको बताया गया है।

• सोने में जीवन बर्बाद न करो।

• माफ़ करना सीखिए।

• रसायन विज्ञान के माध्यम से बेहतर जिएं।

• जो आप चाहते हैं उसे जरूर खरीदें।

• अपने काम को समय हंड्रेड परसेंट दें।

• दूसरों के नहीं अपने अनुसार जिएं।

यह सब तरीके आपको मानसिक रोगों से दूर रखने में मदद कर सकते हैं लेकिन आधुनिक जीवन में लोग इतने व्यस्त रहने लगे हैं जिस वजह से लोग इन सब कामों के लिए वक्त नहीं निकाल पाते।

पर हमें खुद पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है उसके लिए व्यस्त जीवनशैली से खुद को जरूर दें और अपनी स्वयं की देखभाल पर विशेष ध्यान दें।

अगर हम ध्यान से देखे तो समझ आएगा कि दुख का मतलब है इच्छाओं की पूर्ति ना होना। जैसे किसी बच्चे का खिलौना उसे न मिलना, बच्चों का माता-पिता का कहना ना मानना, लड़का या लड़की की शादी की मर्जी के खिलाफ होना आदि।

वास्तव में हम अपने जीवन की अपूर्ण इच्छाओं की वजह से ही दुखी होते हैं कुछ दुख अल्पकालीन होते हैं और लंबे समय तक हमें दुखी करते हैं।

लेकिन ऐसी कोई चीज नहीं है जिसका अंत नहीं है अगर आपके साथ कुछ बुरा हुआ है इसका मतलब यह नहीं है कि आपके साथ कभी अच्छा नहीं होगा।

अपनी जीवन को सुखमय बनाने के लिए आपको सकारात्मक दृष्टिकोण बनाने की जरूरत है। दुख तो हर किसी की जिंदगी में आते हैं बस निर्भर हम पर करता है कौन दुखों से हारता है और कौन अपनी कोशिशों से दुखों को हराता है।

दोस्तों अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इसे शेयर जरूर करें।

Saniya Qureshi is a Health and Beauty writer, senior consultant and health educator with over 5 years of experience.

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